पुराने घर की खुशबू
हमारे बचपन की तरह ____
हमारा घर भी बहुत पीछे छूट जाता है_____
मगर उसकी खुशबू हमारे मन से कभी नहीं जाती.
एक संत की तरह हमारा घर एकांतवासी हो जाता है.
बरामदे में पडी कुरसियों
जंगले से जर्रजर गेट
झाडियों से अटा बगिया______और
कमरे की हाल मत पुछिये दिलबर__!
माँ की लोरी अब भी गूँजती है
हर दर दिवार.
जिंदगी खींच ले जाती है हमें___घर से बहुत दूर
हमारा घर बाट जोहता रहता है.
दादी-दादी की आँखों का पानी सुख जाता है.
झूखे पत्ते की तरह एक दिन___
वे जाते हैं झर.
हमारे घर की दहलिज
तब भी_____
जोहती है हमारी बाट
कली रूठ- रूठ के खिल जाती है
इस आश में कि___
घर की खुशबू एक दिन हमें खींच लाएगी.
और विडम्बना देखिये____
हम आते तो हैं मगर_____
घर की निलामी के लिए__!!"
हमारे बचपन की तरह ____
हमारा घर भी बहुत पीछे छूट जाता है_____
मगर उसकी खुशबू हमारे मन से कभी नहीं जाती.
एक संत की तरह हमारा घर एकांतवासी हो जाता है.
बरामदे में पडी कुरसियों
जंगले से जर्रजर गेट
झाडियों से अटा बगिया______और
कमरे की हाल मत पुछिये दिलबर__!
माँ की लोरी अब भी गूँजती है
हर दर दिवार.
जिंदगी खींच ले जाती है हमें___घर से बहुत दूर
हमारा घर बाट जोहता रहता है.
दादी-दादी की आँखों का पानी सुख जाता है.
झूखे पत्ते की तरह एक दिन___
वे जाते हैं झर.
हमारे घर की दहलिज
तब भी_____
जोहती है हमारी बाट
कली रूठ- रूठ के खिल जाती है
इस आश में कि___
घर की खुशबू एक दिन हमें खींच लाएगी.
और विडम्बना देखिये____
हम आते तो हैं मगर_____
घर की निलामी के लिए__!!"
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