कितने सवाल उठते हैं ____ मगर अधूरे____ मन की आशाएँ उतनी ही चंचल सागर में उठती जितनी लहरें। आकाश में जितने हैं उड़ते बादल नारी पूछ रही सदियों से एक सवाल कहाँ है मेरे पग तले की ज़मीन ? कभी कन्या, कभी भार्या बनकर ___ इतनी भरी धरतीी में मैं क्यों अस्तित्वहीन /